Chapter 13
आदर अपमानसँ भय
मूल
宠辱若惊,贵大患若身。
何谓宠辱若惊?宠为下,得之若惊,失之若惊,是谓宠辱若惊。
何谓贵大患若身?吾所以有大患者,为吾有身,及吾无身,吾有何患?
故贵以身为天下,若可寄天下;爱以身为天下,若可托天下。
何谓宠辱若惊?宠为下,得之若惊,失之若惊,是谓宠辱若惊。
何谓贵大患若身?吾所以有大患者,为吾有身,及吾无身,吾有何患?
故贵以身为天下,若可寄天下;爱以身为天下,若可托天下。
अनुवाद
आदर आ अपमानसँ भय लगैत अछि, महान दुःखसभक सम्मान शरीरक जकै सँग अछि। आदर अपमानसँ भय किए कहैत अछि? आदर निम्न अछि, एकरासँ भेटल परे अछि भय, हराएल परे अछि भय, एही कारणे आदर अपमानसँ भय कहल जाइत अछि। महान दुःखसभक सम्मान शरीरक जकै सँग किए कहैत अछि? हमरा सब महान दुःख अछि एइ कारणे जे हमर शरीर अछि, जँ हमर शरीर नै होएत तँ हमरा की दुःख होएत? एही कारणे जे शरीरक सम्मानसँ संसारक सेवा करैत अछि ओ अछि तँ संसारकें आ सौंपि देल जा सकैत अछि; जे शरीरक प्रेमसँ संसारक सेवा करैत अछि ओ अछि तँ संसारकें सौंपि देल जा सकैत अछि।
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
ई अध्याय कहैत अछि जे आदर आ अपमान दुनू हमरा समान रूपसँ भयभीत करैत अछि। जँ हमर शरीर नै होएत तँ की दुःख होएत? शरीरक प्रति अति आसक्ति अछि जे महान दुःखक कारण बनैत अछि।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
मैं सोचैत छी जे बाहरी मान्यता वा निन्दासँ मैं की बुझैत छी। जँ कोनो मुझकें प्रशंसा करैत अछि तँ गर्व आ जँ निन्दा करैत अछि तँ क्रोध होइत अछि। ई सोच अछि जे मैं अपन शरीर आ प्रतिष्ठासँ अति आसक्त नै होएवाकें कोशिश करब।
आइ हम की करी?
आजुक दिन अपन मनमे एइ बात ध्यान दिअ जे बाहरी प्रशंसा वा निन्दासँ मनक स्थिरता बनाए राखू। सामाजिक मान्यता पर निर्भर नै भए अपन आंतरिक शांति बूझब आ खोजब।
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मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?