Chapter 12

पाँच रंगसभ आँखियार विलग करैत अछि

五色令人目盲,五音令人耳聋,五味令人口爽,驰骋畋猎令人心发狂,难得之货令人行妨。
是以圣人为腹不为目,故去彼取此。
पाँच रंगसभ आँखियार विलग करैत अछि, पाँच ध्वनिसभ कान विकृत करैत अछि, पाँच स्वादसभ जीभ भ्रमित करैत अछि, दौड़-धूप आरू शिकार हृदय पागल करैत अछि, दुर्लभ वस्तु आचरण बिगाड़ैत अछि। एहिकेलन महापुरुष पेटक पालन करैत अछि, आँखियार नहि — एहि कारण ओ दोसरकेँ त्यागि एहि (सरलता)केँ ग्रहण करैत अछि।

गहन चिंतन

ई अध्याय की बारे में बा?

एहि अध्यायमे चेतावनी अछि जे अत्यधिक इंद्रिय सुखसभ — रंग, ध्वनि, स्वाद, उत्तेजना, दुर्लभ वस्तु — मनुष्यकेँ अंध, बहिर, पागल, आरू भ्रष्ट बनाबैत अछि। ऋषि केवल आवश्यक आवश्यकतासभ (पेटक भोजन)केँ पूरा करैत अछि, इंद्रिय विषयसभ (आँखियार सुख)केँ नहि।

एहि कें हमरा सँ की संबंध?

हम अत्यधिक सामग्री, मनोरंजन, आरू विषयसभमे डूबल छी। हर समय फोन, यूट्यूब, बहुत सारऽ सुविधा — ई सब हमर मन केने सीमित करि रहल अछि। ई अध्याय हमरा याद दिलावैत अछि जे सरलता सच्ची स्वतंत्रता अछि।

आइ हम की करी?

आजु एक दिनक लेल अपन फोन समय आधा करू। कोनो तीन घंटा निश्चित राखू जे जखन फोन नहि हेबत। ओहि समय किताब पढ़ू, सैर करू, वा परिवारसँ बात करू। ई इंद्रियसभक शांति अछि।

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मम विचार

एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?

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