Chapter 42
यात्रा सँ एक
मूल
人之所恶,唯孤、寡、不谷,而王公以为称。故物或损之而益,或益之而损。
人之所教,我亦教之。强梁者不得其死,吾将以为教父。
अनुवाद
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
एहि अध्याय मे बताओल गेल अछि जे यात्रा सँ सभ किछु उत्पन्न भेलक अछि। यात्रा एक अछि, एक सँ दुइ (यिन-यांग), दुइ सँ तीन, आ तीन सँ अनगिनत बस्तु। सभ बस्तु मे दुइ विपरीत शक्ति कें संतुलन होइछ। जे बात सब कम पसंद करइछ - जेना कि एकल रहबा - राजा लोग ओकरा सम्मान कें चिन्ह बनाबैछ। शिक्षा कें अंत मे कहल गेल अछि जे जबरदस्ती करनिहार कें अच्छा अंत नहि भेटइछ।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
हम सब कें जीवन मे अहिना-अहिना संतुलन कें खोज रहले छी। जखन सब कुछ ठीक नहि लगइछ तँ मैं समझैत छी जे कोनो नव संतुलन बनैत अछि। जबरदस्ती करय सँ कोनो लाभ नहि - यात्रा कें प्रकृति पर छोड़ देबाक अछि।
आइ हम की करी?
आजु कोनो ऐसन कार्य करय सँ बचू जे जबरदस्ती हो। जे किछु कम लगइछ ओकरा स्वीकार करू, आ जे किछु बेसी लगइछ ओकरा कम करय कें कोशिश करू। संतुलन कें प्रकृति पर छोड़ देले जाए।
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मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?