Chapter 40

विपरीत गामिन यात्रा

反者道之动,弱者道之用。天下万物生于有,有生于无。
जे किछु विपरीत होइछ ओकर यात्रा यात्रा एहन होइछ, दुर्बलता यात्रा कें कार्य होइछ। संसार कें सभ बस्तु अस्तित्व मे जन्म लेलक अछि, अस्तित्व अनास्तित्व मे जन्म लेलक अछि।

गहन चिंतन

ई अध्याय की बारे में बा?

एहि अध्याय मे कहल गेल अछि जे यात्रा कें गति विपरीत दिशा मे होइछ - जखन किछु अपन चरम सीमा पर पहुँच जाइछ तँ ओ वापस मुड़ि जाइछ। दुर्बलता कें माध्यम स यात्रा आपन कार्य करइछ। सभ बस्तु जे अछि ओकरा जन्म अनअछि सँ भेलक अछि, आ ओ अनअछि सँ भेलक अछि।

एहि कें हमरा सँ की संबंध?

महिना कें साथ मे जखन जीवन मे कठिनाइयाँ आइछ तँ मैं समझैत छी जे ई प्रकृति कें नियम अछि। हर उच्चतम बिन्दु पछातक अधःपतन होइछ आ हर गहिर खाई पछातक ऊर्ध्वगति। मेरा सीखैले जे दुर्बलता मे शक्ति अछि।

आइ हम की करी?

आजु किछु कठिन कार्य स हटि नहि जाए जाए। अस्तित्व कें प्रकृति पर विश्वास करैत हुए कोनो नव अवसर कें स्वागत करू।

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मम विचार

एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?

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