Chapter 39

प्राचीन काल में एक (道) के प्राप्तकर्ता

昔之得一者:天得一以清,地得一以宁,神得一以灵,谷得一以盈,万物得一以生,侯王得一以为天下贞。
其致之,天无以清将恐裂,地无以宁将恐发,神无以灵将恐歇,谷无以盈将恐竭,万物无以生将恐灭,侯王无以贵高将恐蹶。
故贵以贱为本,高以下为基。是以侯王自称孤、寡、不谷。此非以贱为本邪?非乎?故致数誉无誉。不欲琭琭如玉,珞珞如石。
जे प्राचीन काल में एक (道) के प्राप्त कएला: आकाश एक के प्राप्त कएला तऽ निर्मल भएला, पृथिवी एक के प्राप्त कएला तऽ शांत भएला, देवता-आत्मा एक के प्राप्त कएला तऽ सजीव भएला, घाटी एक के प्राप्त कएला तऽ पूर्ण भएला, समस्त जड़-चेतन एक के प्राप्त कएला तऽ जीवित रहला, राजा-शासक एक के प्राप्त कएला तऽ विश्व के मार्गदर्शन कएला। एहि के फल ई: आकाश एक के बिना निर्मल नै रहत अगर निर्मल नै रहत तऽ फाटि जाएत; पृथिवी एक के बिना शांत नै रहत अगर शांत नै रहत तऽ भूकंपित होएत; देवता-आत्मा एक के बिना सजीव नै रहत अगर सजीव नै रहत तऽ मृत होएत; घाटी एक के बिना पूर्ण नै रहत अगर पूर्ण नै रहत तऽ सूखि जाएत; समस्त जड़-चेतन एक के बिना जीवित नै रहत अगर जीवित नै रहत तऽ नाश होएत; राजा-शासक एक के बिना उच्च नै रहत अगर उच्च नै रहत तऽ पड़ि जाएत। एहि से कारण नीच नै मानल जाए तऽ मूल्यवान नै होएत, नीचा नै मानल जाए तऽ ऊँच नै होएत। एहि कारण राजा-शासक अपनापर 'अकेला,' 'विरल,' 'अयोग्य' कहैत छथि। की ई नीच के मूल नै छै? की नै? एहि कारण सब प्रशंसा प्रशंसा नै छै। नै चाहय बहुमूल्य मणि बनि कए बनू, चाहय साधारण पाथर बनि कए रहू।

गहन चिंतन

ई अध्याय की बारे में बा?

एहि अध्याय में कहल गेल छै कि सब जड़-चेतन विश्व में एक (道) के प्राप्त करला पर सब किछु ठीक चलैत छै। आकाश निर्मल होएत छै, पृथिवी शांत होएत छै, देवता-आत्मा सजीव होएत छै। जखन एहि एक (道) के बिना होएत छै, तऽ आकाश फाटि जाएत छै, पृथिवी भूकंपित होएत छै। राजा-शासको नीचा आ नीच जनता पर निर्भर होएत छै। जे मूल्यवान छै, ओकरा बिना किछु नै चलि सकैत छै।

एहि कें हमरा सँ की संबंध?

हमरा जीवन में एहि बात के महत्व बुझला से कई गोट झगड़ा घटि गेला। जखन महंगाई में अपन कमाई के मूल्य समझला, तऽ ई बात स्पष्ट भएला कि जे धन-दौलत नै छै, ओकरा के भीतर कोनो मूल्य नै छै। अपन जीवन में एहि एक (道) के खोज करबा से मन शांत भएला छै। जखन नीचा के सम्मान करबा लगला, तऽ ऊँचाई स्वतः मिलला।

आइ हम की करी?

आज एक काम करू: जे सबसे नीचा आ दरिद्र मनुख हमरा चारो में छै, ओकर संग बात करू, ओकरा के सम्मान दिखाउ। कोनो प्रकार के भेदभाव नै करू। दिन भर में कम से कम एक गोट गरीब मनुख के हँसी-मुस्कान दिखाउ। एहि से अपन में ई बात स्थापित करू कि हम सब एक छियाना, आ एहि एक (道) के प्राप्त करबा में कोनो गुराइ नै छै।

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मम विचार

एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?

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