Chapter 41

यात्रा सुननिहार

上士闻道,勤而行之;中士闻道,若存若亡;下士闻道,大笑之。不笑不足以为道。
故建言有之:明道若昧,进道若退,夷道若颣,上德若谷,大白若辱,广德若不足,建德若偷,质真若渝,大方无隅,大器晚成,大音希声,大象无形,道隐无名。夫唯道,善贷且成。
उच्च श्रेणी कें व्यक्ति जखन यात्रा सुनइछ, तँ जी जोर सँ ओकर अनुसरण करइछ। मध्यम श्रेणी कें व्यक्ति जखन यात्रा सुनइछ, तँ एकटा विश्वास अछि एकटा नहि। निम्न श्रेणी कें व्यक्ति जखन यात्रा सुनइछ, तँ हाँसि देइछ। जदि ओ हाँसि नहि तँ ओ यात्रा नहि कहल जाइत। एहि कारण पूर्वज्जन कहल अछि - यात्रा कें मार्ग कम चमकदार होइछ, आगू बढ़निहार लोग मानौ पीछु हटि रहल अछि, सरल मार्ग कम उखड़-खाबड़ होइछ, उच्च सद्गुण गहिर नीच्चाई मानौ लगइछ, शुद्ध चरित्र कम कलंकित होइछ, विस्तृत सद्गुण अपूर्ण होइछ, दृढ़ सद्गुण कम चोर नीच होइछ, शुद्ध प्रकृति कम बदलैत होइछ, विशाल क्षेत्र कम कोनो कोंण नहि, महान बस्तु उच्च समय मे पूर्ण होइछ, महान ध्वनि कम श्रव्य होइछ, महान रूप कम दिखाई देइछ, यात्रा अदृश्य अछि आ नाम नहि। जे किछु यात्रा अछि ओही शुद्ध दान दैत अछि आ पूर्ण करइछ।

गहन चिंतन

ई अध्याय की बारे में बा?

एहि अध्याय मे कहल गेल अछि जे विभिन्न लोग यात्रा कें प्रति भिन्न-भिन्न प्रतिक्रिया दैछ। जे लोग बुद्धिमान अछि ओ लोग यात्रा कें जी जोर सँ अभ्यास करइछ, जे लोग साधारण अछि ओ लोग मंझगाई सँ देखइछ, आ जे लोग अज्ञ अछि ओ लोग हाँसि उड़ाइछ। यात्रा कें सच्चाई एहि मे अछि जे ई साधारण नहि लगइछ - ई विपरीत आ परोपकारी लगइछ।

एहि कें हमरा सँ की संबंध?

मेरा जीवन मे जखन कोनो नव मार्गदर्शन मिलैछ तँ मेरा भीतर एकटा संघर्ष हुअय छैय। कोनी बेर मेरा लगइछ जे ई सब बकबक अछि, कोनी बेर मेरा लगइछ जे ई सत्य अछि। एहि अध्याय सँ मैं समझैत छी जे मेरा संदेह प्राकृतिक अछि।

आइ हम की करी?

आजु कोनो नव विचार या सिद्धान्त कें, जे मेरा पहिले अटकल लगल अछि, एकटा खुला मन सँ परखू। ओकरा पूर्णमात्रा अस्वीकार करय सँ पहिने ओकर अनुसरण करय कें प्रयास करू।

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मम विचार

एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?

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