Chapter 35

महान प्रतीककेँ थामब

执大象,天下往。往而不害,安平太。
乐与饵,过客止。道之出口,淡乎其无味,视之不足见,听之不足闻,用之不足既。
महान प्रतीककेँ जे थामैछ, तकर दुनिया चलि आबैछ। चलि आबैछ मुदा हानि नहि पहुँचैछ, शांति आरू कल्याण मिलैछ। बजन आरू भोजन यात्रीकें रोकि दैछ। जे पथ बखानल जाइछ, ओ बेस्वाद अछि, देखबामे नहि आबैछ, सुनबामे नहि आबैछ, मुदा जखन उपयोग करैछ, तँ ओ कभुओ नहि सकैछ।

गहन चिंतन

ई अध्याय की बारे में बा?

ई अध्याय बताबैछ जे पथक प्रतीककेँ जे थामैछ, तकर दुनियाँ आकर्षित होयछ। दुनियाँक भौतिक वस्तुएँ जेना संगीत आरू खानायु भइएो सुखद अछि, तेना पथ अलक्षित अछि, मुदा एकर उपयोग अनंत अछि।

एहि कें हमरा सँ की संबंध?

हमर जीवमे मैं बाहरी सुखसभकेँ खोजैत रहैछी, मुदा साँच्चक सुख आंतरिक अछि आरू ओ पथपर चलबासँ मिलैछ। सरलता आरू शांति मेर जीवनक सच्चा लक्ष्य अछि।

आइ हम की करी?

आजु हम भीड़भाड़ या मायासभसँ दूर भेटि केई शांतिपूर्ण क्षण बिताब, जेना प्रकृतिमे, आरू ओहि नीरवतामे पथकेँ महसूस करबाक प्रयास करब।

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मम विचार

एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?

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