Chapter 19

पण्डिताई आओर ज्ञानके परित्याग

绝圣弃智,民利百倍;绝仁弃义,民复孝慈;绝巧弃利,盗贼无有。
此三者以为文不足,故令有所属:见素抱朴,少私寡欲。
संतोष आओर ज्ञानके परित्याग करू, तँ लोकके सैकड़ों गुना लाभ होइहै। दया आओर धार्मिकता छोड़ि देउ, तँ लोकमे पुनः सद्भाव आओर माता-पिताक प्रति आदर फिरि आओत। छल-कपट आओर लाभ-लोभ त्याग करू, तँ चोर-डাকैता भी नै रहब। एहि तीनू गुड़ाई केवल शब्दमे छै, एकरा पुरा करबाक लेल बहुत नै अछि। एकर स्थान पर एहि बातके आश्रय लेउ: सादगी दिखाबू, सरलता कबुलाबू, स्वार्थ घटाबू, इच्छा कम करू।

गहन चिंतन

ई अध्याय की बारे में बा?

ई अध्याय कहैत अछि जे जखन हम पण्डिताई आओर बुद्धि-कौशलके परित्याग करैत छी, तखन लोकमे सहज शांति आओर समृद्धि आबैत अछि। कृत्रिम नैतिकता आओर छल-कपटके त्याग करबासे मनुष्यमे पुनः मूल प्रकृति — सच्चा दया, सद्भाव, आओर माता-पिताप्रति आदर — फिरि सें जागैत अछि। बाह्यी शिक्षा आओर नियमके बजाय आंतरिक सरलता आओर शुद्धताक पालन करब जेबरा अछि।

एहि कें हमरा सँ की संबंध?

हम जानैत छी जे बाह्य ज्ञान आओर प्रशंसाक खोजमे हम अक्सर अपन मूल सरलतासे कोनै जाइत छी। संतोष आओर ज्ञानके परित्याग करबाचलन हमर लेल कठिन अछि, किन्तु ई सिखबैत अछि जे आभासी महत्वाकांक्षाक बजाय सहज जीवनमे अधिक शांति मिलैत अछि। हम अपन जीवनमे बेसी कृत्रिम संबंध आओर जटिल मानसिक बोझसें दूर हेब चाहैत छी।

आइ हम की करी?

आज एक दिन कोनों नवा कौशल सीखबाक या उपलब्धि पावबाक चेष्टा नै करू। बजाय ओहि, सादगीसें जीबाक अभ्यास करू — सादा भोजन करू, बिनु फेसबुक-ट्विटर केर निर्विघ्न समय बिताबू, आओर काबुलियत जे सहज रूपसे आबैत अछि ताहिमे प्रसन्न रहू।

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मम विचार

एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?

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