Chapter 29
जे दुनिया गम लैणा चाहै
Original
故物或行或随,或嘘或吹,或强或羸,或挫或隳。
是以圣人去甚,去奢,去泰。
अनुवाद
मैं देखता जा ओह कामयाब नेईं होणा।
दुनिया एक पवित्र बर्तन जा,
ओह हाथ नेईं लगानी चाहिदी।
जे कोई लगावै, बिगाड़ दिंदा जा।
जे पकड़ै, खो दिंदा जा।
इसलिए चीज़ां कभी आगे चल्दीया जन,
कभी पीछे।
कभी ठंडी सांस लैंदीया जन,
कभी गर्म।
कभी मज़बूत होंदीया जन,
कभी कमज़ोर।
कभी बचा लैंदीया जन,
कभी गिरा दिंदीया जन।
इसलिए बुद्धिमान इंसान
भारी चीज़ां त्यागदा जा,
ऐश इत्यादारी त्यागदा जा,
अउर ज़्यादती त्यागदा जा।
गहरी सोच
ऐ चैप्टर बारे में क्या ऐ?
ई अध्याय बणदा दीं कि दुनिया नेईं पकड़नी चाहिदी। जे कोई ओह पर काबू करणा चाहै, हार जांवै। दुनिया एक पवित्र बर्तन जैसी जा - जे बहुत प्यार करै, ओह तोड़ दिंदा जा। हर चीज़ अपनी राह चल्दी जा - कुछ आगे, कुछ पीछे। बुद्धिमान इंसान ज़्यादती नेईं करदा। ओह तीन गलतिय़ां त्यागदा जा - ज़्यादा मांगना, ज़्यादा मोताबा, अउर ज़्यादा घमंड।
एह मेरे कन्ने किवें संबंधित ऐ?
मेरी ज़िन्दगी दीं, मैं बार बार चीज़ां पकड़णा चाहैं। अपनी जगह, अपनी पहचान, अपने लोग। जे कुछ बदलै, मैं घबरा जांदा जां। पर ई अध्याय सिखावैदा जा कि जे छोड़ीं, ओह आपै चलैंदा जा। जे मैं दुनिया दीं ज़रूरत अनुसार बहां, बिना पकड़े, तां मेरा दिल हल्का रहै।
What should I do today?
आज मैं कोई एक चीज़ पकड़नी बंद करांगी जा जे मैं बहुत दिनों से पकड़ै बिठाई जा। कोई गिला, कोई नज़रिया, या कोई महत्वकांक्षा। ओह छोड़ के देखांगी कि मेरे हाथ खाली नेईं होंदे - बस मुक्त हो जांदे जन।
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मेरी सोच
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