Chapter 6
घाटीक आत्मा कभु मरैत नहि अछि
मूल
谷神不死,是谓玄牝。玄牝之门,是谓天地根。绵绵若存,用之不勤。
अनुवाद
घाटीक आत्मा कभु मरैत नहि अछि, एकरा गहन माता कहू। गहन माताक द्वार एकरा आकाश आओर पृथिवीक मूल कहू। निरंतर आओर कोमल आछे, माने हमेशा विद्यमान अछि, प्रयोग करैत हुए कभु थकैत नहि अछि।
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
ई अध्याय बताइत अछि जे प्रकृति कें ऊर्जा कभु समाप्त नहि होइत अछि। ओ एकटा गहन, कोमल शक्ति अछि जे सब कुछ कें जन्म दैत अछि। ओकरा प्रयोग करैत हुए कभु कम नहि होइत अछि।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
माने जीवनमे हम कभी-कभी थक जाइत अछि, किनु ई अध्याय सिखाइत अछि जे आबिदा शक्ति अनंत अछि। जखन हम कोमल आओर निरंतर रहैत अछि, तखन हम कभी नहि थकैत अछि।
आइ हम की करी?
आज कोनो एकटा सृजनात्मक कार्य कोमल आओर निरंतर गति सँ करू। जोर-जबरदस्ती नहि करू, प्रकृतिक प्रवाहकें अनुसरण करू। ऊर्जाकें संरक्षित राखू आओर प्राकृतिक रूप सँ प्रवाहित होमए देउ।
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मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?