Chapter 54
उत्तम निर्माता उखाड़ नै सकल जाइत अछि
मूल
修之于身,其德乃真;修之于家,其德乃余;修之于乡,其德乃长;修之于国,其德乃丰;修之于天下,其德乃普。
故以身观身,以家观家,以乡观乡,以国观国,以天下观天下。吾何以知天下然哉?以此。
अनुवाद
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
एहि अध्यायमे कहल गेल अछि जे जे कोनो पुनः पुनः निर्माण करै छनि ओ दृढ़ अछि, जे धारण करै छनि ओ नै छूटै छनि। गुणकँ प्रचार विभिन्न स्तर पर होतै छनि — व्यक्ति, परिवार, गाम, राज्य, संसार। एहि कारण देखावँ कि प्रत्येक व्यक्ति अपन आत्मसँ प्रारम्भ करू।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
हमर परिवारमे जे नैतिकता, ईमानदारी, कठिन परिश्रम, आरू संयम अछि, ओ जँ हम अपन जीवनमे पालन करै छु तँ मारे-पोता धरि ओ गुण टिकतै छनि। मैथिली समाजमे गाँव-समुदायकँ पुनर्जीवित करू इहाँ राष्ट्रकँ बलवान बनाबए इहाँ आधार अछि।
आइ हम की करी?
आजु एकटा कार्य करू — अपन जीवनमे कोनो एक गुण चुनू जे हम चाहै छी कि हमर बच्चा-पोते धरि टिकू। ओ गुण कँ आजुसँ आरू नियमित रूपमे अभ्यास करू। उदाहरणकँ लेल, कोनो वचन, कोनो आचरण, वा कोनो मूल्य जे प्रतिदिन जीवनमे देखाबए।
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मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?