Chapter 52

जगतकँ एकटा उत्पत्ति अछि

天下有始,以为天下母。既得其母,以知其子;既知其子,复守其母,没身不殆。
塞其兑,闭其门,终身不勤。开其兑,济其事,终身不救。
见小曰明,守柔曰强。用其光,复归其明,无遗身殃,是为习常。
संसारक एकटा उत्पत्ति अछि, जे मानि लेल ताहि संसारक माता अछि। जँ माताकँ जानि लेल तहिना पुत्रकँ जानि सकै छी। जँ पुत्रकँ जानि लेल तहिना पुनः माताकँ सुरक्षित राखू, तँ जीवनभरि कखनो खतरा नै होयत। अपन रन्ध्र बंद करू, अपन द्वार बंद करू, तँ जीवनभरि कष्ट नै होयत। अपन रन्ध्र खोलू, अपन कार्य पूरा करू, तँ जीवनभरि कँहू नै बचा सकै छी। नन्हें कँ देखबए इहाँ ज्ञान अछि, कोमल कँ थामबए इहाँ बल अछि। तेहन प्रकाशकँ प्रयोग करू, फेर अपन ज्ञानमें लौटू, एहिसँ कखनो दुर्घटना नै होयत, एहि इहाँ शाश्वत धर्मकँ अनुसरण अछि।

गहन चिंतन

ई अध्याय की बारे में बा?

एहि अध्यायमे कहल गेल अछि जे संसारक एकटा मूल उत्पत्ति अछि, जे सबटा काजकँ जन्म दै छनि। जे मूल कँ जानै छनि ओ जे ओकरँ सँ उत्पन्न भेल अछि ताहुदे जानै छनि। मूल कँ जानबए इहाँ पुत्र कँ जानबए आ जादा गहन ज्ञान हाबै छनि।

एहि कें हमरा सँ की संबंध?

हम सब निरन्तर नव-नव कार्यमे लागल रहै छियनै, मूल कँ भूल जादै छियनै। मैथिली संस्कृतिकँ रीतिरिवाज, हमर परिवारकँ मूल्य, हमर आत्मज्ञान — एहि सब कँ सम्झबए इहाँ हमर जीवनकँ स्थिरता दै छनि। जँ हम मातृभूमि आ मूल संस्कृतिकँ जानै छियन तँ हम पुत्र-पौत्र धरि शांति कँ पाबै छियनै।

आइ हम की करी?

आजु एकटा कार्य करू — अपन परिवारकँ कोनो पुरान गाथा, कोनो कहानी, कोनो व्यक्तिगत अनुभव लिखू वा रेकार्ड करू। अपन मूल कँ जानबए इहाँ जड़ता कँ विकास होयतै छनि।

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मम विचार

एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?

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