Chapter 31

शस्त्रासन

夫佳兵者,不祥之器,物或恶之,故有道者不处。
君子居则贵左,用兵则贵右。兵者不祥之器,非君子之器,不得已而用之,恬淡为上。胜而不美,而美之者,是乐杀人。夫乐杀人者,则不可以得志于天下矣。
吉事尚左,凶事尚右。偏将军居左,上将军居右,言以丧礼处之。杀人之众,以哀悲泣之,战胜以丧礼处之。
श्रेष्ठ शस्त्रासन कोना नहि मङ्गलमय अस्त्र छै, प्रकृतियो सर्व सज्जन ओकरा घृणा करैत छै, एही कारणे साधु मनुख ओकरा पास नहि रहैत। जे मनुख संसारमे बसैत छथि, से पवित्र बाँयाँ पक्षके सन्मान करैत छथि, मुदा जखन युद्ध करैत छथि, तखन दाहिनाँ पक्षके। शस्त्रासन कोना नहि मङ्गलमय अस्त्र छै, ओ कोना अलङ्कारी मनुख केर हतियार नहि। एहि केर उपयोग केवल अनिवार्य समयमे करू, शान्ति आर सादगीसँ ओकरा चलावू। जे जीतैत छथि, से सुन्दर नहि मानैत, मुदा जे सुन्दर मानैत छथि, से जनकेर हत्यामे आनन्द पाबैत छथि। जे मनुख जनकेर हत्यामे आनन्द पाबैत छथि, ओ समस्त संसारमे आपन मनोरथ प्राप्त नहि करि सकैत। शुभ कार्यमे बाँयाँके आदर करू, अशुभ कार्यमे दाहिनाँके। उप-जनरल बाँयाँ बैसैत छथि, प्रधान जनरल दाहिनाँ बैसैत छथि - ई सब सूचित करैत छथि कि युद्धकेर मृत्यु-संस्कारसँ व्यवहार करू। मारल गेल बहुत मनुख केर प्रति शोक आर विलाप करू। युद्धमे विजय भेला पर, ओकरा मृत्यु-संस्कार जकाँ मनाउ।

गहन चिंतन

ई अध्याय की बारे में बा?

एहि अध्यायमे कहल गेल छै कि शस्त्रासन कोना नहि मङ्गलमय अस्त्र छै, ओ सब प्रकृतियो नहि चाहैत। जे मनुख युद्धमे प्रसन्न होइत छथि, ओ कोना शान्ति पावि सकैत छथि? युद्धमे जीत भेला पर भी शोक व्यक्त करू पड़ैत छै, कियाकि ओ मृत्यु केर कारण बनैत छथि।

एहि कें हमरा सँ की संबंध?

हम जीवनमे कोना शस्त्रासनक गप सुनैत छिऐ? कहियो कहल जाइत छै कि बल प्रयोग केरलेइ सब समाधान भेल जाइत छै, मुदा ई अध्याय हमके स्मरण करावैत छै कि हिंसा कोना कमजोरी केहो हो सकैत छै। जखन हम कुनु विवादमे जीतैत छिऐ, तखन हम केना नहि शोक मनाबैत?

आइ हम की करी?

आज अपन परिवार वा सहकर्मीसँ कोनो मतभेद होय तँ बल प्रयोग करबाक बजाय बातचीत वा समझौता करू। हिंसाक बजाय शान्ति केर रास्ता खोजू।

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मम विचार

एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?

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