अध्याय 8

सबसे बड़वान भलाई पानी जइसन बा

上善若水。水善利万物而不争,处众人之所恶,故几于道。
居善地,心善渊,与善仁,言善信,政善治,事善能,动善时。夫唯不争,故无尤。
सबसे बड़वान भलाई पानी जइसन बा। पानी सब जीव के हित करत हुवे अउर कौनी से नाहीं बराबरी करत हुवे। ऊ उहाँ रहत हुवे जहाँ दूसरन के घृणा बा, एही से ई लगभग ताओ जइसन बा। जहाँ रहे ऊ भलाई जगह होई, मन के गहराई होई, दूसरन से भलाई करे, बात में सच्चाई होई, काम में ठीकठाक होई, हर काम में योग्यता होई, हर हरकत में समय के जानकारी होई। जे नाहीं बराबरी करत ऊ के कुछ दोष नाहीं होत।

गहरा चिंतन

यह अध्याय किस बारे में है?

ई अध्याय पानी के उदाहरण से बतावत हुवे कि बड़वान मनइका काहे जइसन होय चाहिए। पानी सब जीव के हित करत हुवे अउर कम नीच जगह में रहत हुवे जहाँ दूसरन के जाय नाहीं। ऊ बिना लड़े-झगड़े के अपना काम करत हुवे। जे बिना बराबरी के रहत हुवे ऊ के कोई दोष नाहीं लगत।

यह मुझसे कैसे संबंधित है?

हमारा जीवन में बड़े सबे से झगड़ा होत रहत हुवे - बिजनेस में प्रतिस्पर्धा, घर में झगड़ा, रिश्ता में अकड़। हर बेर हम जिताव के चाहत बा। पर ई अध्याय हम के सिखावत हुवे कि पानी जइसन बनो - सबके हित करो अउर कौनी से नाहीं लड़ो। एकरा से जीवन में शांति मिलत हुवे।

आज मुझे क्या करना चाहिए?

आज के दिन हम कोशिश करब कि कौनी से बराबरी नाहीं करब। जब कोई हम के बुरा कही, हम शांत रहब अउर मुस्कुराब। जब कोई हमारा काम में बाधा देई, हम धैर्य राखब। जब हम किसे से मिलब ऊ के भलाई सोचब। एकरा से हमारा मन के शांति मिलेगी अउर दूसरन के भी भलाई होई।

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मेरा चिंतन

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