अध्याय 78

पानी के शक्ति

天下莫柔弱于水,而攻坚强者莫之能胜,以其无以易之。
弱之胜强,柔之胜刚,天下莫不知,莫能行。
是以圣人云:受国之垢是谓社稷主,受国不祥是为天下王。正言若反。
दुनिया में पानी से नरम-कमजोर कुछ नइखे, फेर भी सबसे कठोर-बलवान चीज के तोड़े में ओकर समान कोनो नइखे, काहें से कि ओकर बदल में दूसर कुछ नइखे। कमजोर के बलवान पर जितल, नरम के कठोर पर जितल, ई बात दुनिया में हर एक जानेला, पर हर एक एकर अनुसरण नाहीं करेला। एहिजे से संत कहेला: जे देश के अपमान के बहन करेला ओही के राष्ट्रपति कहल जाला, जे देश के बदकिस्मती के बहन करेला ओही के राजा कहल जाला। सही बात एहिजे उल्ट मालूम पड़ेला।

गहरा चिंतन

यह अध्याय किस बारे में है?

ई अध्याय पानी के रूप में नरमाई के विजय के कहानी बा। दुनिया में सबसे नरम पानी सबसे कठोर चट्टान के भी तोड़ सकेला काहें से कि ओ हरदम बहत रही।

यह मुझसे कैसे संबंधित है?

हम में से हर एक के जिंदगी में कठिनाई आवेला जे कठोर-सी लागेला। पर पानी के गुण हमनी के सिखावेला कि लचकदार रहल से बड़ा चीज के जीता जा सकल बा।

आज मुझे क्या करना चाहिए?

आज जब कवनो कठिनाई या चुनौती मिले, हम कठोर प्रतिरोध के बजाय लचक के रास्ता चुनीं - जइसे पानी बहेला, हम भी अपनी स्थिति के अनुसार बहत रहीं।

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मेरा चिंतन

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