अध्याय 9
भर के राखे से अच्छा समय पर छोड़ देवे बा
Original
金玉满堂,莫之能守;富贵而骄,自遗其咎。
功遂身退,天之道也。
अनुवाद
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
ई अध्याय सावधान करावत हुवे कि जे कुछ जादा भर लेत हुवे ऊ टँक जात हुवे। जे धार के तीक्ष्ण राखत हुवे ऊ टूट जात हुवे। धन-दौलत से घर भर जाय पर कोई नाहीं बचा पावत। जब काम सिद्ध हो जाय तउ पीछे हट जावे के चाहिए - ई प्रकृति के नियम बा।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
हम जब कुछ पावत बा तउ अउर पावे के चाहत बा। धन और बड़ाई पावके मन में घमंड आ जात हुवे। पर ई अध्याय हम के सिखावत हुवे कि सब कुछ पावके भी शांत रहना चाहिए अउर जब काम सिद्ध हो जाय तउ आगे बढ़ जाना चाहिए। नाहीं तो नाश होई।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज के दिन हम अपना जीवन में देखब कि हमारा पास जादा बा कि नाहीं। जे जादा बा ओकरा के किसे से बाँट देब - धन हो या समय। अउर जे काम हमारा लेल पूरा हो चुका बा ओकरा के छोड़ के नया काम शुरू करब। एकरा से हमारा मन हल्का रहेगा अउर जीवन में संतुलन बना रहेगा।
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मेरा चिंतन
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