अध्याय 67
मोर तीन गहना
Original
我有三宝,持而保之:一曰慈,二曰俭,三曰不敢为天下先。
慈故能勇,俭故能广,不敢为天下先故能成器长。
今舍慈且勇,舍俭且广,舍后且先,死矣!夫慈,以战则胜,以守则固。天将救之,以慈卫之。
अनुवाद
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
ई अध्याय कहेला कि जे मनुष्य सच्चाई के रास्ता प जाला ओकरा के तीन गहना के जरूरत बा - दया, मितव्ययिता आ दुनिया से पाछे रहल। ई तीनों मिल के हमरा के सच्चा ताकत देत बा। दया हमरा के बहादुर बनावेला, मितव्ययिता हमरा के दुनिया भर में फइलावेला आ पाछे रहल हमरा के सब के आदर दिलावेला।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
हम अक्सर अपनामो बड़ाई के चाहत बानी जा आ आगे निकले के कोशिश करत बानी जा। बाकिर ई अध्याय हमरा के सिखावेला कि सच्चा ताकत दया में बा, लालच में नाहीं। जब हम दूसरन के प्रति दयालु होईं त हमर जिन्दगी में भी शांति आई।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज जब कवनो मुश्किल हालत में पड़ूं, त पहिले हौसला ना दिखावे के चाहत करूं, बलुक दया के रास्ता खोजूं। कवनो गरीब के मदद करूं या कवनो के दर्द में साथ दिहल जाए।
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