अध्याय 56

जानेवाला बकय नाहीं, बकेवाला जानय नाहीं

知者不言,言者不知。
塞其兑,闭其门,挫其锐,解其纷,和其光,同其尘,是谓玄同。
故不可得而亲,不可得而疏;不可得而利,不可得而害;不可得而贵,不可得而贱。故为天下贵。
जे जानय ऊ नाहीं बकय। जे बकय ऊ नाहीं जानय। अपने इंद्रियन के रास्ता बंद करय, दरवाजा-झरोखा बंद राखय। अपने तेज के कुंद करय, फँसल के सुलझावय। अपने निजर के चमक के मंद करय, मिट्टी के धूलि के समान हो जावय। ई कहियय 'गहन एकता'। अइसने में न नजदीकी हो सकय, न दूरी। न फायदा, न नुकसान। न ऊँचाई, न नीचाई। ई कारन ई बात दुनिया में सबसे कीमती होय।

गहरा चिंतन

यह अध्याय किस बारे में है?

ई अध्याय बतावय कि सच्चा ज्ञानी मुनफा नाहीं बकय, और जे बहुत बोलय ऊ वास्तव में कुछ नाहीं जानय। ई कहय कि ज्ञानी मनुख अपने इंद्रियन के द्वार बंद कर देवय, अपने तेज-तार के छिपावय, और सब के समान हो जावय - ई कहियय 'गहन एकता'। अइसने में न कोनो अपनापन होय, न बैर। न फायदा, न नुकसान।

यह मुझसे कैसे संबंधित है?

हम में से बहुतेरे लोग अपने ज्ञान के प्रदर्शन करे में मजा पावय। सोशल मीडिया पर, दोस्तन के बीच, परिवार में - हर जगह अपने विचार सुनावय में सुख लेबय। फेरु अक्सर देखले बानी कि जे लोग सबसे बड़का बोलय, ऊ लोग के कम जान होय। ई अध्याय हमका सिखावय कि चुप रहय, सुनय, और दूसरन के साथ एक होय में कइसे गहराई बढ़य।

आज मुझे क्या करना चाहिए?

आज हम कोसिस करबानी कि पूरा दिन कम बोलबानी और जादा सुनबानी। जब कवनो बात करे का मन होय, तब पहिले पूरा सुनय, बीच में नाहीं काटय। अपने ज्ञान के प्रदर्शन करे के इच्छा के साथ रोकबानी। दूसरन के साथ एकता के भाव में रहय का कोसिस करबानी।

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मेरा चिंतन

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