अध्याय 55
अधिकारवाला के नवजात बालक सम होय
Original
未知牝牡之合而朘作,精之至也。终日号而不嗄,和之至也。
知和曰常,知常曰明。益生曰祥,心使气曰强。物壮则老,谓之不道,不道早已。
अनुवाद
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
ई अध्याय बतावय कि जे मनुख बड़ भारी अधिकार वाला होय, ओकरा के नवजात बालक सम हो जाबय। नवजात बालक में प्रकृति के रस भरपूर होय, ओकरा में कोनो दुर्भावना नाहीं हवय। ई कहय कि जीवन के चरम सामंजस्य में रहय तो जगत के नियम समझ में आवय। फेरु चेतावनी देवय कि शरीर के ताकत के नशा में नाहीं पड़य काहें से कि ताकतवर होते-होते बूढ़ापा आ जाबय।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
हम में से कई लोग जवानी के ताकत और सक्कियता के नशा में रहय। लगय कि हम सब कुछ कर सकत बानी, फेरु धीरे-धीरे समझ में आवय कि शरीर कमजोर हो जाबय। ई अध्याय हमका सिखावय कि जीवन में सामंजस्य बनाए रखय, प्रकृति के रस में रमय। जब हम अपने भीतर के शिशु के जोड़े रहबय, तब हम निरोग और खुश रहबानी।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज हम अपने भीतर के बच्चा के याद करबानी। कवनो शिशुवत खेल में भाग लेबानी जइसे कि चित्र बनावय, गाना गावय, या बगीचा में खेलबानी। अपने शरीर के तनाव के ढीला करबानी और प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहय का कोसिस करबानी।
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मेरा चिंतन
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