Chapter 73

हिम्मत आ बहादुरी

勇于敢则杀,勇于不敢则活。此两者,或利或害。天之所恶,孰知其故?是以圣人犹难之。
天之道,不争而善胜,不言而善应,不召而自来,繟然而善谋。天网恢恢,疏而不失。
जे बहादुरीसँ हिम्मत करैत अछि ओ मारल जाइत अछि, जे बहादुरीसँ नहि करैत अछि ओ जीवित रहैत अछि। एहि दुनू बातमे कोनो फाइदा अछि आ कोनो नुकसान अछि। स्वर्ग जे बातसँ अरुचि राखैत अछि, ओकर कारण कोन जानत अछि? एहि लेल धर्मी मनुष्य लेलो ई बात समझना कठिन अछि।
स्वर्गक मार्ग कोनो झगड़ा नहि करतु हुअै फिरो जीतैत अछि, कोनो बोलनाइ नहि बोलतु हुअै फिरो जवाब देत अछि, कोनो बुलावइ नहि दियतु हुअै फिरो अपने आबैत अछि, आ आरामसँ योजना बनबैत अछि। स्वर्गक जाल बहुत चौड अछि, ढील अछि, फेरु किछु नै छूटैत अछि।

गहन चिंतन

ई अध्याय की बारे में बा?

स्वर्गक मार्ग कोनो जबर्दस्ती नहि करतु हुअै जीतैत अछि, कोनो कहनाइ नहि बोलतु हुअै जवाब देत अछि, आ कोनो बुलावइ नहि दियतु हुअै अपने आबैत अछि। ई बात बतावैत अछि जे प्रकृति सहज रूपेऽ सब किछु करत अछि।

एहि कें हमरा सँ की संबंध?

हम अपन जीवनमे जब जबर्दस्ती करैत छी तब असफल होइछी। जब सहज रूपेऽ बहि जाइछी तब बात बनि जाइछि। एहि बात के समझि कऽ हम शांति अनुभव कऽ सकैत छी।

आइ हम की करी?

आजि जे बातमे हम जबर्दस्ती करैत छी ओकरा देखब आ सहज रूपेऽ बहि जाइबाक कोशिश करब।

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मम विचार

एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?

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