Chapter 45

महान सिद्धि अपूर्ण मानी पड़ैत अछि

大成若缺,其用不弊。大盈若冲,其用不穷。
大直若屈,大巧若拙,大辩若讷。
躁胜寒,静胜热。清静为天下正。
महान सिद्धि अपूर्ण मानी पड़ैत अछि, पर एकर उपयोग कहियो नै रुकैत अछि। महान परिपूर्णता खाली मानी पड़ैत अछि, पर एकर उपयोग कहियो नै सूरैत अछि। महान सीधापन टेढ़ मानी पड़ैत अछि, महान कौशल अटकल मानी पड़ैत अछि, महान वाक्पटुता मून मानी पड़ैत अछि। गतिविधि शीतलताक जितैत अछि, शांति उष्माक जितैत अछि। शांत आ शुद्ध रहनोला जगतके सही रास्ता देखावैत अछि।

गहन चिंतन

ई अध्याय की बारे में बा?

ई अध्याय कहैत अछि जे सच्चा परिपूर्णता अधूर्ण मानी पड़ैत अछि। जे बड़ लगैत अछि ओकरा भीतर खालीपन होयत अछि। सच्ची चतुराई अपछुआ मानी पड़ैत अछि। शांति सबसँ बड़ शक्ति अछि।

एहि कें हमरा सँ की संबंध?

मोन करैत छी जे मैं जखन अपन सीमा स्वीकार करैत छूँ आ नम्र रहैत छूँ, तखन सच्चा शक्ति पावैत छूँ। दिखावा नै कयर आपन पार आ बुझाबय कोशिश करैत छी।

आइ हम की करी?

आजि भीड़मे बड़ बोलबाक या दिखावा करयाक स्थितिमे शांत रहय कोशिश करैत छी। चुप रहबामे, सुनबामे आ धैर्य राखबामे शक्ति अछि।

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मम विचार

एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?

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