Chapter 37
नित्य निराकार कर्म
मूल
अनुवाद
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
एहि अध्यायमे कहल गेल अछि जे ताओ सदा निष्क्रिय अछि, किन्तु सब किछु ओ करैत अछि। जे राजा एहि सिद्धांत केँ मानैत अछि, ताहि सब वस्तु स्वतः परिवर्तित होयत। जखन मनुष्यमे इच्छा जागैत अछि, तखन अनाम सरलता (朴) सँ ओकरा शांत करब। ई सरलता वासनारहित अछि, आर एहि सँ संसार स्थिर होयत अछि।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
मेरा जीवनमे हर रोज बहुत सारा कार्य करबाक लेल दबाव अछि। किन्तु ई अध्याय मोती सिखावैत अछि जे कम करब आर अधिक परिणाम ला अछि। जखन हम नियंत्रण करबा छोड़ दैत छी आर सहज रहैत छी, तखन सब किछु अपन वक़्त पर ठीक होयत अछि।
आइ हम की करी?
आज एक दिन नियंत्रण करबा केँ बजाय सहज रहू। जे समस्या अछि, ओकरा जान दियू, परिणाम सब आपसमे आबत अछि। शांत बैसू आर देखू जे किछु होयत अछि।
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मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?