Chapter 23

कम बोलब पारदरेशी अछि

希言自然。故飘风不终朝,骤雨不终日。孰为此者?天地。天地尚不能久,而况于人乎?
故从事于道者,道者同于道,德者同于德,失者同于失。同于道者,道亦乐得之;同于德者,德亦乐得之;同于失者,失亦乐得之。信不足焉,有不信焉。
कम बोलब पारदरेशी अछि। झंझर हवा सबे दिन नहि चलथि, तेज बरखा सबे दिन नहि होथि। का एकर कारण अछि? आकास माटी। आकास माटी केहु बेसी दिन नहि टिक सकथि, तऽ मनुख केर बात? एकरा कारण जे कोनो दैविक मार्ग पर चलथि, ओ ओकरा संगै चलथि; जे पवित्रता पर चलथि ओ ओकरा संगै चलथि; जे खो जाबा में लागल अछि ओ ओकरा संगै खो जाबा में लागल रहथि। जे दैविक मार्ग पर चलथि, दैविक मार्ग भी ओकरा प्रसन्न होइत अछि; जे पवित्रता पर चलथि, पवित्रता भी ओकरा प्रसन्न होइत अछि; जे खो जाबा में लागल अछि, खो जाबा भी ओकरा प्रसन्न होइत अछि। विश्वास में कमी अछि तऽ कम विश्वास अछि।

गहन चिंतन

ई अध्याय की बारे में बा?

एहि अध्याय कहथि अछि जे कम बोलब प्रकृति क लचीलापन अछि। जेना तेज हवा आ बरखा बहुत दिन नहि रहि सकथि, तेहनहि अधिकता सेहो नहि रहि सकथि। जे कोनो दैविक मार्ग पर चलथि, ओ दैविक मार्ग क प्राप्ति करथि।

एहि कें हमरा सँ की संबंध?

मेरा जीवन में बहुत बोलबा के आदत अछि, मुने लगत अछि जे बेसी बोलूं तऽ बेसी समझाबल जाइत अछि। बात कम करबा में मेरा शांति मिलथि आ मेरा बात नहि बिगड़थि।

आइ हम की करी?

आज एक बेर मेरा बात कम करी आ जँ गुछथि तऽ सुनबा। ओहि व्यक्ति क बात में दोसर केर बात काटबा नहि। बात कम करीं तऽ प्रकृति क संग चलबा।

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मम विचार

एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?

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