Chapter 28
जाणना होरैं जां होरा
Original
知其白,守其黑,为天下式。为天下式,常德不忒,复归于无极。
知其荣,守其辱,为天下谷。为天下谷,常德乃足,复归于朴。
朴散则为器,圣人用之则为官长。故大制不割。
अनुवाद
दुनिया दीं घाटी बणै।
घाटी बणै, गुण नेईं जांदे,
फिरि बच्चे दीं याद आवै।
जे दीं चमक जाणै, अंधेरा बणाये राखै,
दुनिया दा रूप बणै।
रूप बणै, गुण नेईं भटकदे,
फिरि अनंत दीं याद आवै।
जे दीं इज्जत जाणै, बेइज्जती बणाये राखै,
दुनिया दीं वल्ली बणै।
वल्ली बणै, गुण भरपूर होंदे,
फिरि सादगी दीं याद आवै।
सादगी टुकड़िय़ां बणै, कमाल बणांदे।
बुद्धिमान इन्हें मुखिया बणांदे।
पर बड़ी रचना नेईं काटदी।
गहरी सोच
ऐ चैप्टर बारे में क्या ऐ?
ई अध्याय बणदा दीं कि दुनिया दीं शक्ति जाणनी चाहिदी जा, पर शांति बणाये राखनी चाहिदी जा। जे मनुस दीं ताकत जाणै, दुर्बलता बणाये राखै, ओह सच्चा बणदा जा। फिरि बच्चे दीं निर्दोशता अंवै। जे रोशनी जाणै, अंधेरा बणाये राखै, ओह बराबरी पावै। जे इज्जत जाणै, बेइज्जती स्वीकारै, ओह सच्ची शांति पावै। ई सारा जगत गूंजदा जा कि कोई अकेला नेईं होंदा - सब कुछ जुड़दा जा।
एह मेरे कन्ने किवें संबंधित ऐ?
मेरी ज़िन्दगी दीं, मैं बार बार ताकत दिखावैं जा। जे कोई मेरा कमज़ोर देखै, मैं घबरा जांदा जां। पर ई अध्याय मुझैं सिखावैदा जा कि सच्ची ताकत दुर्बलता दीं होंदी जा। जे मैं अपनी डींग मारनी बंद करां, अउर सुननी सीखां, तां मेरे अंदर शांति आवै। मैं जे कमज़ोरिया स्वीकारां, ओह मुझैं मज़बूत बणांदीया जन।
What should I do today?
आज मैं किसी बात दीं अपनी ज़ुबान नेईं चलाणी। जे कोई मेरी टीका करै, मैं शांति बणाये सुनांगी। अपनी ताकत नेईं दिखावणी, पर काम ज़रूर करांगी। फिर देखांगी कि जगत मेरा कसूर कितना सह लैंदा जा।
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मेरी सोच
What does this chapter inspire in you? How will you apply it?