अध्याय 75

जब जमीन के लोग भूखे रहेला

民之饥,以其上食税之多,是以饥。民之难治,以其上之有为,是以难治。民之轻死,以其上求生之厚,是以轻死。
夫唯无以生为者,是贤于贵生。
जमीन के लोगन के भूख लागत बा काहें से कि ऊपर वाला बहुत टैक्स लेवेला, एही से भूख पड़ेला। जमीन के लोगन के हरकत में ना लवा जा सकेला काहें से कि ऊपर वाला बहुत कुछ करे के कोशिश करेला, एही से ओकरा के नियंत्रित ना कइल जा सकेला। जमीन के लोगन के मरब से बेफिकर रहेला काहें से कि ऊपर वाला अपना जीयब के बहुत प्यार करेला, एही से ओकरा के मरब से भय ना रहेला।

और जे कोई अपना जीयब के महत्व ना देवेला ओही जीयब के सच्चा तरीका बा।

गहन चिंतन

एहि अध्याय में का बात होला?

ई अध्याय हमरा के बतावेला कि जब सरकार ज्यादा टैक्स लेवेला त लोग भूखे रहेला। जब सरकार हर काम में दखल देवेला त लोगन के नियंत्रित ना कइल जा सकेला। जब सरकार अपना आनंद में रहेला त लोगन के मौत से भय ना रहेला।

एहि के मोहल्ला से का संबंध?

जादा मांग-मटक ना करब, सादगी में रहीब। जब हम अपना जीयब के ज्यादा ना चाहब त सच्चा आनंद मिलेला।

आज का करब?

आज हम कोशिश करब कि कम में संतोष मनावब, अपना जरूरत के कम राखब, आ दूसरन के भी कम से कम दिहब।

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मोहना विचार

एहि अध्याय में रउआ के का प्रेरित करेला? रउआ एकरा केसे लागू करब?

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