अध्याय 53

जदि हमारा के कुछ समझ होई

使我介然有知,行于大道,唯施是畏。
大道甚夷,而民好径。朝甚除,田甚芜,仓甚虚,服文彩,带利剑,厌饮食,财货有余,是谓盗夸。非道也哉!
जदि हमारा के कुछ समझ-बूझ होई, त हम बड़का रास्ता पे चलिहीं, बस घुमाव से डर लागी। बड़का रास्ता बहुत सीधा-सादा बा, लेकिन लोग टेढ़ा रास्ता पसंद करेला। महल बड़का सुंदर बा, खेत बड़का बंजर बा, कोठार बड़का खाली बा। लोग झीनका कपड़ा पहिनेला, तेज तलवार लटकावेला, खाने-पीने से ऊब गइल बा, दौलत के ज्यादा बा - एहिसे के चोर के डंड कहल जाला। एह रास्ता से बिल्कुल उल्टा बा!

गहन चिंतन

एहि अध्याय में का बात होला?

एह चैप्टर में बड़का-सीधा रास्ता के बात कहल गइल बा जे सबके खातिर खुला बा। लेकिन लोग एकरा छोड़ के घुमाव-फिराव वाला रास्ता पसंद करेला काहे कि ओह में दिखावा बा। जे लोग चोर के डंड कहल जाला ओ सब चीज के बाहरी शान में दिखावेला लेकिन अंदर से खाली बा।

एहि के मोहल्ला से का संबंध?

जब हम दूसर लोग के देखत बानीं उनकर शान-ओ-शौकत पे त बहुत प्रभावित हो जात बानीं। लेकिन ओह लोग के अंदर के खालीपन के ना देख पात बानीं। ई बड़का रास्ता से भटकाव हमारा के भी हो सकेला।

आज का करब?

आज अपने दिखावा के चीज के लिस्ट बनाईं - जे हमारा खातिर सच्चमुच जरूरी बा आ जे सब बस दिखावा ले। फेर से सोचीं कि कहाँ-कहाँ बच्चा के रास्ता पे जाई के चाहीं।

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मोहना विचार

एहि अध्याय में रउआ के का प्रेरित करेला? रउआ एकरा केसे लागू करब?

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