अध्याय 5

आसमान-जमीन के निष्ठुरता

天地不仁,以万物为刍狗;圣人不仁,以百姓为刍狗。
天地之间,其犹橐籥乎?虚而不屈,动而愈出。
多言数穷,不如守中。
आसमान आ जमीन निर्दयी होखेला, ऊ सब जीव-जंतु के पुतला कुत्ता जइसना मानेला। संत भी निर्दयी होखेला, ऊ सब लोग के पुतला कुत्ता जइसना मानेला। आसमान आ जमीन के बीच में, ई बजरा के थैली जइसना ना? खाली बा, पर कभी खतम ना होला, जेसे जेसे चलावल जाला, उतेसे बेसी बहराइल जाला। बहुते बोलन से शक्ति खतम हो जाला, बरकस में बीच में रहल बेहतर बा।

गहन चिंतन

एहि अध्याय में का बात होला?

ई अध्याय बतावेला कि आसमान-जमीन आ संत सबके बराबर देखेला, कवनो पसंद ना करेला। ई बजरा जइसना बा: जेसे-जेसे हवा निकलत जाला, उतेसे बेसी हवा भरत जाला। बहुते बोलन से कवनो फायदा ना होला।

एहि के मोहल्ला से का संबंध?

हमरा जिनगी में बहुते बेर ऐसन लागत बा कि कुछ बेसी बोले के, कुछ बेसी समझावे के। पर ई अध्याय हमके सिखावेला कि ज्यादा बोलन से बात खतम हो जाला। बीच में रहल, शांत रहल, ई सच्ची शक्ति बा।

आज का करब?

आज हम कोशिश करब कि कम बोलब, ज्यादा सुनब। जब कवनो झगड़ा होखे, त हम बीच में ना पड़ब। बस शांत रह के देखब कि कवन दिशा में बात जात बा।

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मोहना विचार

एहि अध्याय में रउआ के का प्रेरित करेला? रउआ एकरा केसे लागू करब?

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