अध्याय 42
एक से भइल सब
मूल
道生一,一生二,二生三,三生万物。万物负阴而抱阳,冲气以为和。
人之所恶,唯孤、寡、不谷,而王公以为称。故物或损之而益,或益之而损。
人之所教,我亦教之。强梁者不得其死,吾将以为教父。
人之所恶,唯孤、寡、不谷,而王公以为称。故物或损之而益,或益之而损。
人之所教,我亦教之。强梁者不得其死,吾将以为教父。
अनुवाद
सत्य से एक भइल, एके से दू भइल, दू से तीन भइल, तीन से सब जगत के चीज भइल। सब चीज में दोनों बात बा - अँधेरा आ रोशनी, ठंडा आ गरम। इहें दोनू के मिलान से सब कुछ बनल बा। लोग जे बात ना चाहेला - अकेलापन, कमी, भूख - ओही बात के राजा-महाराजा अपने नाम में लेवेला। एही से जे चीज कम होला बा ओकरा में फायदा होला, आ जे बहुत होला ओकरा में नुकसान होला। जे बात दूसरा लोग सिखावेला, हमहूँ ओकरा सिखावेला। जो मजबूती से टकड़ला ऊ कहीं के ना रहेला - ई हम सिखावे के मूल बात मानइया।
गहन चिंतन
एहि अध्याय में का बात होला?
ई अध्याय बतावेला कि कइसे एक सत्य से सब कुछ बनल। जादा से कम हो जाला, कम से जादा। लोग जे बात से बचेला - अकेलापन, कमी - ओही बात के राजा-महाराजा अपने नाम में लेवेला। मजबूती का साथ जो लोग पेश आवेला, ओकरा के कुछ ना मिलेला।
एहि के मोहल्ला से का संबंध?
मेरे जिनगी में भी कमी के बखान करे के पड़ल बा। जब मैं अकेला रहले बानी, त सीखले बानी। जब कमजोरी मान लिहले बानी, त बलवान बन गइले बानी।
आज का करब?
आज जवन कमी अपने में दिखी, ओकरा के शर्माने की जगह ओकरा के स्वीकार करी। अकेलापन के समय में खुद से काम करी। जब कुछ कम लागे, त समझीं कि ई अउरी बढ़े के संकेत हवे।
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मोहना विचार
एहि अध्याय में रउआ के का प्रेरित करेला? रउआ एकरा केसे लागू करब?