अध्याय 51

तई सबके जनमहू का कारण बा

道生之,德畜之,物形之,势成之。是以万物莫不尊道而贵德。
道之尊,德之贵,夫莫之命而常自然。
故道生之,德畜之,长之育之,亭之毒之,养之覆之。生而不有,为而不恃,长而不宰,是谓玄德。
तई सबके जनमहू करेला, गुण बा ओकरा पालन-पोषण करेला, वस्तु-रूप देला, परिस्थिति ओकर पूर्ण करेला। एकर कारन सब जगत तई के आदर करेला आउर गुण के महत्व जानेला। तई के आदर, गुण के महत्व - एकर कवनो हुकुम नाही बा, सब कुछ अपने आप हो रहल बा। एही से तई सबके जनमहू करेला, गुण बा पाले-पोसेला, बड़ करेला, पालन करेला, परिपक्व करेला, पोषण करेला, संभालेला। जनहू के बाद भी नाही लेला, किछू करे के बाद भी नाही मानला, सबके बड़ हुआ के बाद भी ओकरा के नाही हुकुम दियला - एही के कहल जाला गहिर गुण।

गहरा चिंतन

यह अध्याय किस बारे में है?

ई अध्याय बतावेला कि तई सबके जनमहू करेला आउर ओकर गुण सबके पालन-पोषण करेला। सब जगत तई के आदर करेला काहे से कि ई सबके रचना करेला बिना कवनो हुकुम के, सब कुछ अपने आप हो रहल बा। तई जनहू के बाद भी नाही लेला, करे के बाद भी नाही मानला, बड़ करे के बाद भी हुकुम नाही दियला - एही के गहिर गुण कहल जाला।

यह मुझसे कैसे संबंधित है?

मई भी कई काम करेला आउर ओकरे बदला में कुछ पावे के आशा करेला। बाकी ई अध्याय सिखावेला कि जब कई करेला बिना कुछ पावे के चाह, बिना नाम लेवे के चाह, बिना हुकुम देवे के चाह - ओही में सच्ची महानता बा।

आज मुझे क्या करना चाहिए?

आज जे कई करेला, ओकरा में से अपनी आशा आउर स्वार्थ निकाले के चाहीं। बिना कुछ पावे के चाह, काम करे के आनंद लेवे के चाहीं। जब कई करेला त ओकरा के अपनी नाही माने के चाहीं।

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मेरा चिंतन

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