Chapter 66
नदिया-सागर वट्टलीं राजा
Original
是以欲上民,必以言下之;欲先民,必以身后之。
是以圣人处上而民不重,处前而民不害。是以天下乐推而不厌。
以其不争,故天下莫能与之争。
अनुवाद
गहरो विचार
इ अध्याय किण बारे में है?
ई अध्याय कहत हों जे नदिया आर सागर सब घाटियों कों राजा होंवत हों कैसेकि से सब सों नीचौ रहत हों। जो ऊपर रहणौ चाहियौ सो विनम्र रहियौ, जो आगौ रहणौ चाहियौ सो पीछौ रहियौ। संत पुरुष ऊपर रहियौ पर भार नाहीं दियो, आगौ रहियौ पर नुकसान नाहीं पहुँचायौ। जो लड़ाई न करियौ, तेरा कोई मुकाबलौ नाहीं कर सकत।
इ म्हारे सूं केड़ो संबंधित है?
म्हारे जीवन में मैं बार-बार चाह्यौ जे सब कों आगौ राखूं, सब कों बतायूं, सब कों सिखायूं। पर ई अध्याय कहत हों जे सब सों नीचौ रहियौ तौं सब आपणें आ जायं। जो ऊपर दिखात हों, सो नीचौ गिरत हों।
आज म्हैं के करणो चाहीजे?
आज म्हारे परिवार या दुकान में जे सब सों बडौ़ हों, सो कम-से-कम एक बार विनम्रतौं सों सुनियौ, सलाह मागियौ। कोई जे कम पढ़ियौ हों, तेन्हारी बात भी महत्व दियौ। ई कठिन हों, पर ईसौं ही शक्ति मिलती हों।
संबंधित अध्याय
म्हारो विचार
What does this chapter inspire in you? How will you apply it?