Chapter 29
जगत णै हाथ मा लेवै वाला
Original
故物或行或随,或嘘或吹,或强或羸,或挫或隳。
是以圣人去甚,去奢,去泰。
अनुवाद
एठो चीज़ा मा हर एक री अपनी चाल छे - कोय अगे रै, कोय पिछे रै, कोय हंसे, कोय बरसे, कोय ताकतवाणो, कोय कमज़ोर, कोय थकावै, कोय बिगाड़ै।
एठो करणाला पंडित जिण णै बहुत बढ़िया काम णा करे, बहुत दिखावा णा करे, बहुत ताकत णा दाखवाये।
गहरो विचार
इ अध्याय किण बारे में है?
आळो पांडे णै बताै कि जे जगत णै जोर णै लेवै चाहे, से हारी जाये। जगत एगू पविण पात्र छे जा णै कोय बदल णा सके। जे चीज़ा जोर णै पकड़े वालो छे, से गँवाये वे। हर चीज़ री अपनी प्रकृति छे - कुछ आगे चले, कुछ पीछे, कुछ हल्के, कुछ भारी। एठो पंडित जिण बहुत बढ़िया णा करे, बहुत शान णा दिखाये, बहुत ताकत णा लगाये।
इ म्हारे सूं केड़ो संबंधित है?
हाैं, मी पण कई बेर जगत णै बदलणे री कोशिश करी छे - लोगां णै, परिस्थिति णै, सब कुछ। पर हर बेर मी हारी गयो। एकरै बदले मी जगत री प्रकृति णै समझणे लाग्यो छे - हर चीज़ री अपनी चाल छे, मी णा बदल सकूं। आज मी सोची छे कि जे मी जोर णै करूंगो, से हारेगा। मी बस चलणे दूं, बहाव मा साथ दीऊं।
आज म्हैं के करणो चाहीजे?
आज जे कुछ मी जोर णै बदलणे री कोशिश करी रियो छे, से छोड़ दूं। जे मी पकड़ी बैठ्यो छे, से ढीला कर दूं। साँझ णै कुछ बहुत बढ़िया काम णा करणे री जगह णा राखूं, बस जैसा छे वैसा छे एकरै साथ रहूं।
संबंधित अध्याय
म्हारो विचार
What does this chapter inspire in you? How will you apply it?