Chapter 76
मनुष्यक जन्म नरम आओर कमजोर होएत अछि
मूल
故坚强者死之徒,柔弱者生之徒。
是以兵强则灭,木强则折。强大处下,柔弱处上。
अनुवाद
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
ई अध्याय कहैत अछि जे जीवन नरम आओर लचीला होत अछि, मृत्यु कठोर आओर अचल। प्रकृति में जे नरम अछि ओ जीवित रहत अछि आओर जे कठोर अछि ओ नष्ट हो जाइत अछि। शक्ति आओर बल के अहंकार में रहनाए मृत्युक मार्ग अछि, जबकि विनम्रता आओर नरमपन में रहनाए जीवनक मार्ग अछि।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
हम सबमे संग संग अहंकार आओर शक्ति प्रदर्शन के लालसा रहय छै, मुदा ई अध्याय हमरा बताइत अछि जे वास्तव में नरम आओर लचीला भाव हमरा जीवनक लेल अधिक उपयोगी अछि। समय के साथ हम कडुआपन आओर अकड़ल स्थिति में आ जाइत छी, जे हमरा आंतरिक शांति खोबय देलक।
आइ हम की करी?
आज अपन दैनिक जीवन में किछु नरम आओर कोमल कार्य करू - कोन व्यक्ति के साथ सहानुभूति संग पेश आवू, कोन काज में अपन अहंकार त्याग के सहयोग दियू, या कोन बात में झगड़ा करय के बजाय समझौता करू। एहिसँ अहां शुरूआत करू जे जलवत प्रकृति क नरम आओर शांतिपूर्ण रहय करू।
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मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?