Chapter 44

नाम आओर शरीरमे की अधिक प्रिय?

名与身孰亲?身与货孰多?得与亡孰病?
是故甚爱必大费,多藏必厚亡。
知足不辱,知止不殆,可以长久。
नाम आओर शरीरमे की अधिक प्रिय? शरीर आओर धनमे की अधिक? पावन आओर हानिमे की अधिक बीमारी? एकरासँ अत्यधिक प्रेममे बड़ खर्च होयत अछि, अधिक जमा करबामे बड़ हानि होयत अछि। संतोष जाननोलासँ अपमानसँ बचावैत अछि, रुकय जाननोलासँ खतरासँ बचावैत अछि, एहि सँ चिरकाल धारण करय पावैत अछि।

गहन चिंतन

ई अध्याय की बारे में बा?

ई अध्याय पुछैत अछि जे की अधिक महत्वपूर्ण अछि - प्रसिद्धि या जीवन? धन या स्वास्थ्य? पावन या इज्जत? अधिक मोह कल्याण नै करैत, बलुक हानि पहुँचावैत अछि।

एहि कें हमरा सँ की संबंध?

मोन करैत छी जे की मेरा सबसँ महत्वपूर्ण अछि। नाम आओर धन आबि जायत रहैत अछि, पर शरीर एकटा अछि। जखन मैं अधिक चाहबाक स्थितिमे होयत छूँ, तखन एहि पाठके याद करैत छी।

आइ हम की करी?

आजि संतोष करय कोशिश करैत छी। जे अछि ओकरासँ खुश रहैत छी आ नै चाहबाक बातके लेल कम चिंता करैत छी। भीड़सँ कोनो कीटी-मोटी चीज़के लेल नै दौड़त छी।

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मम विचार

एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?

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