अध्याय 50

जीवन और मृत्यु

出生入死。生之徒十有三,死之徒十有三,人之生动之死地亦十有三。夫何故?以其生生之厚。
盖闻善摄生者,陆行不遇兕虎,入军不被甲兵。兕无所投其角,虎无所措其爪,兵无所容其刃。夫何故?以其无死地。
जीवन में प्रवेश करना और मृत्यु में प्रवेश करना। जीवन के तेरह भाग हैं, मृत्यु के तेरह भाग हैं, और जीवन को मृत्यु की ओर ले जाने वाले भी तेरह भाग हैं। ऐसा क्यों है? क्योंकि जीवन को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। मैंने सुना है कि जो लोग जीवन को अच्छी तरह से संभालते हैं, वे जमीन पर चलते समय गैंडे या बाघ से नहीं मिलते, और युद्ध में प्रवेश करते समय हथियारों से नहीं बचते। गैंडे को अपने सींग का उपयोग करने का कोई स्थान नहीं मिलता, बाघ को अपने पंजों का उपयोग करने का कोई स्थान नहीं मिलता, और हथियारों को अपनी धार का उपयोग करने का कोई स्थान नहीं मिलता। ऐसा क्यों है? क्योंकि उनके लिए मृत्यु का कोई स्थान नहीं है।

गहन चिंतन

यह अध्याय किस बारे में है?

यह अध्याय बताता है कि जीवन और मृत्यु स्वाभाविक प्रक्रियाएँ हैं, और जो लोग जीवन को अत्यधिक महत्व देते हैं, वे मृत्यु को आमंत्रित करते हैं। जो लोग जीवन को सादगी और संतुलन से जीते हैं, वे खतरों से बचे रहते हैं।

इसका मुझसे क्या संबंध है?

यह मुझे याद दिलाता है कि मृत्यु के भय या जीवन के प्रति अत्यधिक आसक्ति से मुक्त होना चाहिए। जब मैं जीवन को स्वाभाविक रूप से स्वीकार करता हूँ, तो मैं अनावश्यक जोखिमों और चिंताओं से बच सकता हूँ।

आज मुझे क्या करना चाहिए?

आज, मैं जीवन के प्रति अपनी आसक्ति को कम करने का अभ्यास करूँगा, जैसे कि किसी छोटी असुविधा या हानि को स्वीकार करना, और यह समझना कि मृत्यु जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है।

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