अध्याय 60

बड़का देश के हाकिम होवे

治大国若烹小鲜。
以道莅天下,其鬼不神。非其鬼不神,其神不伤人。非其神不伤人,圣人亦不伤人。夫两不相伤,故德交归焉。
बड़का देश के चलावे में ठीक ओहि तरह का समझदारी चाली जइसे छोट मछरी के तेल में पकावे में।

जे परमेश्वर के राह पर देश चलावल जाला, ओह देश के भूत-प्रेत के भी डर ना रही। ना ओकर भूत के शक्ति ना रही, आओर ना ओकर भूत कौनी के दुख देत। ना ओकर परमेश्वर कौनी के दुख देत आओर संत हाकिम भी कौनी के दुख ना देत। जे दूनों कौनी के दुख ना देत, ओह देश में सब के भलाई हो जाला।

गहन चिंतन

एहि अध्याय में का बात होला?

ई अध्याय हमरा के बतावेला कि बड़का देश के चलावे में कोमलता आओर धैर्य जरूरी बा। जइसे मछरी के तेल में पलटे से टूट जाला, ओही तरह देश के बहुत हिलावे से बिगड़ जाला। परमेश्वर के राह पर चले से सब भूत-प्रेत के भी शांति मिलेला आओर सब के भलाई हो जाला।

एहि के मोहल्ला से का संबंध?

हम जान लिहेली कि जादा हस्तक्षेप से कुछ नइहाँ बनत। जादा ढंग से चलावे से सब अपने आप ठीक हो जाला। हमरा जिनगी में भी ई बात लागू होला - जादा जबरदस्ती करे से रिश्ता बिगड़ेला।

आज का करब?

आज हम कोशिश करी जे जादा हस्तक्षेप ना करव, सब के अपना तरीका से काम करे दीवाव आओर धैर्य से राजी रही।

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मोहना विचार

एहि अध्याय में रउआ के का प्रेरित करेला? रउआ एकरा केसे लागू करब?

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