अध्याय 34

बड़का मार्ग फइलल बा

大道泛兮,其可左右。万物恃之而生而不辞,功成不名有。衣养万物而不为主,常无欲,可名于小;万物归焉而不为主,可名为大。
以其终不自为大,故能成其大。
बड़का मार्ग फइलल बा, ओकरा लेली बायें-दायें सबही जगह पहुँचे ला। सब कुछ ओही पर निर्भर रहे ला बाँचे खातिर, अउर ओ कबो इनकार न करे ला। काम पूरा हो गइला पश्चात भी ओ अपना नाव न लेहे ला। ओ सब कुछ के पाले-पोसे ला बिना राजा बनल। बिना कउनो चाह के रहे ला, एही से ओ के छोट कहल जा सके ला; सब कुछ ओकर ले आवे ला बिना स्वामी बनल, एही से ओ के बड़का कहल जा सके ला। जबले ओ अपना आप के बड़का नाहीं माने ला, तबले ओ अपना आप में बड़का बन जाला।

गहन चिंतन

एहि अध्याय में का बात होला?

ई अध्याय कहे ला कि बड़का मार्ग सब जगह फइलल बा अउर सब कुछ के पाले-पोसे ला बिना कबो इनकार कइला। ई काम के पूरा करे ला बिना अधिकार मँगला, अउर ओही से ओ सच्च में बड़का बन जाला।

एहि के मोहल्ला से का संबंध?

हमरा जीवन में भी अइसना होला - जब हम कुछ करे ली जब बिना फजूल के महत्व मँगले, तब काम अउर भी बढ़िया होला।

आज का करब?

आज जब कुछ करे के कोशिश करी, तब फल की चाह न करी बिना अच्छा काम करत रही।

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मोहना विचार

एहि अध्याय में रउआ के का प्रेरित करेला? रउआ एकरा केसे लागू करब?

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