अध्याय 32

ताओ बिना नाम बा रहेला

道常无名,朴虽小,天下莫能臣也。侯王若能守之,万物将自宾。
天地相合,以降甘露,民莫之令而自均。
始制有名,名亦既有,夫亦将知止。知止可以不殆。
譬道之在天下,犹川谷之于江海。
ताओ सदा बिना नाम बा रहेला, ओकर सरलता (पू) थोड़ा बा, परंतु जगत के कोनो ओकरा के वश में नइहन कर सकत।

राजा आरो सामंत जनि इकरा के मानेला, त इहियो जगत सब अपने आप ओकर दास बन जाई।

आकाश आरो पृथ्वी के मिलन से मीठा जल बरसेला, लोग के आज्ञा नइहन देत बाकी सब जगह बराबर बंट जाई।

जब नाम बन जाई त शुरुआत हो जाई, नाम मिल गइला के बाद ठहराव के जगह जाने के चाहीं। ठहराव के जानला से खतरा नइहन रही।

जइसना नदी आरो घाटी समुद्र खातिर बाट बनावेला, ओइसना ताब जगत के लिइ बाट हवे।

गहन चिंतन

एहि अध्याय में का बात होला?

ई अध्याय कहेला जे ताओ सदा बिना नाम रहेला, ओ सरल आरो छोट बा परंतु ओकर शक्ति अनंत हवे। जब राजा एहि सरलता के मान लेला त जगत अपने आप ओकर दास बन जाई। नाम देवा के बाद ठहराव के जगह जाने के चाहीं, नइहन त खतरा हवे। ताओ जगत के लिइ ओइसना हवे जइसना नदी समुद्र खातिर बाट बनावेला।

एहि के मोहल्ला से का संबंध?

हम अपने जीवन में सरलता आरो सादगी के रास्ता पकड़े के चाहीं। बाहरी दिखावा के बजाय भीतर के शांति पर ध्यान देवे के चाहीं। नाम, पद, आरो दिखावा के लालच में न पड़ के सच्ची सरलता में रहे के चाहीं।

आज का करब?

आज एक काम ऐसन करूं जे बिना प्रसिद्धि के, बिना नाम के होखे। कोनो भलाई बिना बतावला के करूं, आरो देखूं जे भीतर से कइसे शांति मिलेला।

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मोहना विचार

एहि अध्याय में रउआ के का प्रेरित करेला? रउआ एकरा केसे लागू करब?

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