अध्याय 7
आकाश अउर धरती बा अनादि बा
Original
是以圣人后其身而身先,外其身而身存。非以其无私邪?故能成其私。
अनुवाद
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
ई अध्याय बतावत हुवे कि आकाश अउर धरती काहे से अनंत बा काहे कि ई अपना भलाई नाहीं चाहत, सबके हित सोचत हुवे। जे मनइका दूसरन के आगे रहत हुवे अउर अपना नाहीं सोचत, लोग ऊ के आदर करत हुवे। जे अपना के पीछे राखत हुवे ऊ बचा रहत हुवे। एही से निःस्वार्थ भाव से काम करने वाला के सब काम सिद्ध होत हुवे।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
हम अक्सर अपना के आगे राखे वाला बा कि मेरा क्या होई, मेरा भलाई काहे से होई। पर ई अध्याय हम के सिखावत हुवे कि जे आपना के पीछे करत हुवे ऊ बड़वान होत हुवे। हमारा जीवन में मेहरत अउर घर के लिए काम करत समय अक्सर मन में खोज होय कि हमारा लेल कुछ बा कि नाहीं। पर ई समझ आवत हुवे कि दूसरन के हित सोचे में ही आपन कल्याण बा।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज के दिन हम तीन बेर दूसरन के मदद करब अउर एकरा खातिर कुछ उमेद नाहीं करब। गरीब के खाना खिलावब, बिटिया के पढ़ाई में मदद करब, या फिर कौनी के काम में हाथ बँटावब - बिना कुछ पावे के उमेद के। एकरा से हमारा मन में जे आनंद आवेगा ऊ हमारा दिल के शांत कर देही।
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