अध्याय 30
धर्म-बिटिया राजा के सहायक वरे
Original
善有果而已,不敢以取强。果而勿矜,果而勿伐,果而勿骄,果而不得已,果而勿强。
物壮则老,是谓不道,不道早已。
अनुवाद
सो बल-बिटिया से संसार पर न चढ़इहैं।
ओकर कर्म आपन-आपन में लौट आवहिं।
जहाँ सेना जाइहैं, तहाँ काँटा-झाड़ उपजइहैं।
बड़की लड़ाई के बाद, अन्नहारी बरखा जरूर होइहैं।
भलई में फल मिले बस,
एहिमें बल-बिटिया से नाहिं पावहिं।
फल मिले पर दंव न करहिं,
फल मिले पर बड़ाई न करहिं,
फल मिले पर घमंड न करहिं,
जब बल-बिटिया अपनो-आनो होइहैं।
जब चीज़ चौगुनी हो जाइहैं,
तब ओकर बूड़ाई होइहैं।
एहिक नाम 'अधर्म' ह,
अधर्म-बिटिया बितिया में नशहारी जाइहैं।
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
एहि पाठ में कहल गईल हवै कि जे मनुख धर्म-बिटिया से राजा के मदद करइहैं, ऊ बल-बिटिया से दुनिया पर न चढ़इहैं। जहाँ लड़ाई-झगड़ा होइहैं, तहाँ काँटा-बिटिया उपजइहैं अउर बड़की लड़ाई के बाद अन्नहारी बरखा होइहैं। भलाई बल-बिटिया से नाहिं होइहैं, प्रेम-बिटिया से होइहैं। जब चीज़ चरम पर पहुँच जाइहैं, तब ओकर गिराई शुरू हो जाइहैं।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
हमार जिनगी में भी बा कि जब हम बल-बिटिया से कुछ करे के कोशिश करइहैं—गुस्सा में, जबरजस्ती में—तब हमार कर्म हमार ले वापस आवहिं। हम देखले बानी जा कि जबरजस्ती से कुछ नाहिं होइहैं, प्रेम से सब होइहैं। बल-बिटिया से इन्सान चौगुन हो जाइहैं, फिर बूड़ जाइहैं।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज जब कवनो बात पर मन टटकी करे, तब बल-बिटिया के बजाय प्रेम-बिटिया के रास्ता लिही। कम से कम एक बेर हल्के में बात के सुलझावे के कोशिश करू, बिना गुस्सा के।
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मेरा चिंतन
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