अध्याय 12
रंग-बिरंग संसार के जाल
Original
是以圣人为腹不为目,故去彼取此。
अनुवाद
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
ई पाठ चेतावनी देवेला कि इंद्रियों के भोग में खो जायबो ठीक नई हवे। रंग, आवाज़, स्वाद, उत्तेजना अउर भौतिक वस्तु - एही पाँच चीज़ हमके अंधा, बहरा, बिगड़ल, पागल अउर भ्रष्ट बना देवेला। सच्चा ज्ञान आंतरिक संतोष में हवे, बाहरी संतुष्टि में नई।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
मेरा जीवन भी निरंतर संकेतों से भरल हवे - हर तरफ विज्ञापन, सूचना, प्रलोभन। मैं खुद के भीतर देखय के कोशिश करे रहा हँ, पर बाहर के शोर में कभी-कभी अपनी आवाज़ सुनाई नई देला। ई पाठ मुझके याद करावेला कि चुप रह के सुनना, भूखा रह के भरना - ई सच्ची साधना हवे।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज मैं सुबह के दो घंटा सोशल मीडिया अउर समाचार से दूर रहूंगा, सादा खायबो खायबो अउर प्रकृति में समय बिताइबो - आँखि के भरय के बजाय पेट के भरय के चुनाव करूंगा।
संबंधित अध्याय
मेरा चिंतन
What does this chapter inspire in you? How will you apply it?