Chapter 51
दो जु गावे सब उपजावे
Original
道之尊,德之贵,夫莫之命而常自然。
故道生之,德畜之,长之育之,亭之毒之,养之覆之。生而不有,为而不恃,长而不宰,是谓玄德。
अनुवाद
गहरो विचार
इ अध्याय किण बारे में है?
हां चेप्टर दो री रचना रे बारे में बणातो हां। दो जु सब कुछ उपजावे हां, गुण हां रे पाले-पोसे, वस्तु हां रो आकार ले ले हां, आर हालत हां रे कारण पूरी होय हां। हां कारण सब कुछ दो रे आगे नमस्कार करत हां आर गुण रे मोहताज हां। दो आर गुण री बडाई कोई हुकम ने चलत ने हां - हां सब कुछ स्वाभाविक रूप से हुंदा हां।
इ म्हारे सूं केड़ो संबंधित है?
मैं प्रायः आपणार काम हां रा कारण मानूं हां। पर हां चेप्टर मुझे सिखावे हां हां, जे सब कुछ दो रे कारण हुंदा हां - मैं बस हां रो हिस्सो हां। हां रे बजाय आपणो अहंकार राखणो, मुझे विनम्र रेहणो चाहियो।
आज म्हैं के करणो चाहीजे?
आज मैं किसी एगो छोटे से काम रे बारे में सोचूं जे मैं बिना किसी फायदे रे करूं - कोई भेंट, कोई मदद, या कोई दान। आर हां रे बजाय कुछ मागणो ने या आपणो काम सम्हारण री बजाय, हां रे लिए आभारी रेहूं।
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म्हारो विचार
What does this chapter inspire in you? How will you apply it?