Chapter 5

दया री जगह न्याय

天地不仁,以万物为刍狗;圣人不仁,以百姓为刍狗。
天地之间,其犹橐籥乎?虚而不屈,动而愈出。
多言数穷,不如守中。
आसमान-ज़मीन रा कोई दया नहीं हे, सब जीव-जड़त रो बराबर ले। संत रोहि बराबर ले सब नर-नारी रो। आसमान ज़मीन री बीच मां, एक भोंई जैसी हे - खाली हुई पर नाकतमी, हिलाओ त जाय बढ़ जाय। बहुत बोलणा सागर मां गिराय वरावर हे, भीतर री धारणा सागर री हे।

गहरो विचार

इ अध्याय किण बारे में है?

प्रकृति रो कोई पसंद-नापसंद नहीं हे। ओ सबहि रो बराबर हे, चाहे वो ऊंचो हो या नीचो।

इ म्हारे सूं केड़ो संबंधित है?

मैं अक्सर अपनी पसंद रे मारे दूसरन रो तौलता हां, पर धाण सबहि रो बराबर हे।

आज म्हैं के करणो चाहीजे?

आज किसी रो भी विचार न कर, जे आया सो आया। बस गिनती मां रख।

संबंधित अध्याय

म्हारो विचार

What does this chapter inspire in you? How will you apply it?

Ask Laotzu About This Chapter Full chat →