Chapter 35
म्हारो रूप पकड़ी राखो
Original
执大象,天下往。往而不害,安平太。
乐与饵,过客止。道之出口,淡乎其无味,视之不足见,听之不足闻,用之不足既。
乐与饵,过客止。道之出口,淡乎其无味,视之不足见,听之不足闻,用之不足既。
अनुवाद
म्हारो रूप पकड़ी राखो, तां सारो संसार तुम्हार कठी आवे हुअो। आवे हनि, हांछे कोई हानी नैर होई, सब शांति में रहे हनि। राग-रंग अर मिठाई मनुष्य कठी रोकि दे हनि। पर म्हारो मार्ग बतायो तां बेसारो हुअो, ज्यो मुठ्ठी में धरो तां बू नैर आई। देखण को नैर दिखे हुअो, सुणण को नैर सुणाई देई, पर जे वारयो तां अंत नैर हुअो।
गहरो विचार
इ अध्याय किण बारे में है?
ई चैप्टर बतावे हनि के म्हारो मार्ग महान हुअो, पर रूप-रंग नैर हुअो। दुनियां वाली चीज़ लोभावे हनि, पर म्हारो मार्ग शांत हुअो। म्हारो मार्ग में मिले हुअो शांति, जे कछू नैर मिटे हुअी।
इ म्हारे सूं केड़ो संबंधित है?
हांछो में देख्या हुअो के दुनियां वाली चीज़ थकी लोभावे हनि - पैसो, शोहरत, की बात। पर जे म्हारो मार्ग पकड़ी राखो, हांछे शांति मिले हुअी। म्हारी मा ज्यो घर में शांति राखी हुअी, हांछे ई म्हारो रूप हुअो।
आज म्हैं के करणो चाहीजे?
आज लोभ वाली चीज़ थकी दूर राखो। जे कछू लोभावे हुअो - चाहे मिठाई, चाहे शोहरत - हांछे थकी अलग राखी राखो। म्हारो मार्ग याद करो अर शांति में राखो।
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म्हारो विचार
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