Chapter 21

उजवो गुण की रीत

孔德之容,惟道是从。
道之为物,惟恍惟惚。惚兮恍兮,其中有象;恍兮惚兮,其中有物;窈兮冥兮,其中有精。其精甚真,其中有信。
自古及今,其名不去,以阅众甫。吾何以知众甫之状哉?以此。
उजवो गुण की रीत बस परमात्मा कू अनुसरती हे। परमात्मा जे चीज़ हे, हूं बस अंध्यारो आरो धुंधलो हे। अंध्यारे में तो अंध्यारो, पर हूं में काईं आकृति हे; धुंधलो में तो धुंधलो, पर हूं में काईं वस्तु हे। गहनो में तो गहनो, पर हूं में काईं सूक्ष्म तत्व हे। हूं तत्व बहुत सच्चो हे, हूं में विश्वास हे। पहले थी आज तक, हूं चीज़ की रूप-नाम बदलतो नीं, हूं सब प्राणियां कू जाणता हे। मैं कैसे जाणूं कि सब प्राणियां कैसे हे? बस हूं चीज़ कू देखी कै।

गहरो विचार

इ अध्याय किण बारे में है?

उजवो गुण, बड़प्पन की रीत-रिवाज बस परमात्मा कू अनुसरती हे। परमात्मा काईं ठोस वस्तु नीं, बस अंध्यारो आरो धुंधलो हे, हूं में आकृति आरो वस्तु दोनों हे। हूं सूक्ष्म आरो सच्चो हे, हूं में विश्वास राखणो जरूर हे। सब प्राणियां हूं परमात्मा से बणे हे, हूं जाणणो कू परमात्मा कू देखणो हे।

इ म्हारे सूं केड़ो संबंधित है?

मैं अक्सर ठोस चीज़ां कू ही सच मानता हों - जे दिखे हे, जे छुओ जा सकै। पर असली चीज़ तो दिखाई नीं देती, जाणी जा सकती हे। परमात्मा कू भी ई बात लागू हे - हूं दिखाई नीं देता, पर हूं सब जगह हे।

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म्हारो विचार

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