Chapter 15
पुरानै बुद्धिमान लोग
Original
古之善为士者,微妙玄通,深不可识。夫唯不可识,故强为之容:
豫兮若冬涉川,犹兮若畏四邻,俨兮其若客,涣兮若冰之将释,敦兮其若朴,旷兮其若谷,混兮其若浊。
孰能浊以静之徐清?孰能安以久动之徐生?保此道者不欲盈。夫唯不盈,故能蔽而新成。
豫兮若冬涉川,犹兮若畏四邻,俨兮其若客,涣兮若冰之将释,敦兮其若朴,旷兮其若谷,混兮其若浊。
孰能浊以静之徐清?孰能安以久动之徐生?保此道者不欲盈。夫唯不盈,故能蔽而新成。
अनुवाद
पुरानै जो बुद्धिमान हुए, हिं अत्यंत सूक्ष्म, गहन अरु अदृश्य हुए — इनै दी समझ इतनी गहरी हों कि कोई जाण ना सकै। इही कारण इनै दा वर्णन इ样 करियासकां:
सावधान — जै बर्फ़ीलै नदी मनभाई पार करियां; डरावना — जै चारों तरफ दुश्मन हों; आदरणीय — जै मेहमान हों; खुलावनहार — जै बर्फ़ पिघलियां; मज़बूत — जै काष्ठ हों; खुलाहारु — जै घाटी हों; मिलनसार — जै गंदलौ पानी हों।
कोई गंदलौ पानी शांत करियै साफ़ करियासकै? कोई शांत रहियै धीरे-धीरे चलियासकै? हिं रास्तौ पकड़ियां वाले संतुष्ट ना होंसकां। इही कारण नए-नए बनियासकां।
सावधान — जै बर्फ़ीलै नदी मनभाई पार करियां; डरावना — जै चारों तरफ दुश्मन हों; आदरणीय — जै मेहमान हों; खुलावनहार — जै बर्फ़ पिघलियां; मज़बूत — जै काष्ठ हों; खुलाहारु — जै घाटी हों; मिलनसार — जै गंदलौ पानी हों।
कोई गंदलौ पानी शांत करियै साफ़ करियासकै? कोई शांत रहियै धीरे-धीरे चलियासकै? हिं रास्तौ पकड़ियां वाले संतुष्ट ना होंसकां। इही कारण नए-नए बनियासकां।
गहरो विचार
इ अध्याय किण बारे में है?
हिं सुबब मनभाई बताया हों कि बुद्धिमान लोग कीसै कैसे हुए — सावधान, विनम्र, खुले मन वाले, संतुष्ट। इनै नैतिक गुण हुए — जै बर्फ़ मनभाई पार करियां, जै मेहमान हों, जै काष्ठ हों। इही कारण इनै बदलियासकें अरु नए बनियासकें।
इ म्हारे सूं केड़ो संबंधित है?
हिं मारै जीवन मनभाई सिखाया हों कि बुद्धिमान होनै मतलब हर बात जाणनै ना हों, बल्कि सावधान रहनै, विनम्र रहनै अरु खुले मन रहनै हों। जै मैं नम्र रहूं, तै मैं बदलियासकूं अरु नया बनियासकूं।
आज म्हैं के करणो चाहीजे?
आज मैं कोई एसौ काम करूं जे मुझै नम्रता सिखायै — कोई बड़ौ काम ना, छोटौ, जै मैं किसै दी सुनूं बिना आपणौ मतलब समझूं। अरु जै कुछ बिगड़ियां जाय, तौ शांति सै ठहरूं।
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म्हारो विचार
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