Chapter 1

मार्ग जो बखणी जाय

道可道,非常道;名可名,非常名。
无名天地之始,有名万物之母。
故常无欲,以观其妙;常有欲,以观其徼。
此两者同出而异名,同谓之玄。玄之又玄,众妙之门。
जो मार्ग वखणी जाय हे, ओ सदावर्त मार्ग नांहि; जो नांव दिये जाय हे, ओ सदावर्त नांव नांहि। जे नांव नांहि, ओ आकासां हे जमीं हे तेरो सुरवाट हे; जे नांव हे, ओ सारा जग हे तेरी माई। तेथें बिना इच्छा के निरखणां, तॆ रहस्यां दीख पावणां; इच्छा राखी कॆ निरखणां, तॆ मर्यादा दीख पावणां। ओ दूनो एक जगहां हे पण नाम अलग हे, दोनों हे गूढ़। गूढ़ हे तरी गूढ़, सारा रहस्यां हे दरवज़ा।

गहरो विचार

इ अध्याय किण बारे में है?

ई पहलो अध्याय हमां सिखावै हे कि जे मार्ग (तातो) बोलणां जाय हे, ओ सच्चो मार्ग नांहि; जे नाम दिये जाय हे, ओ सच्चो नाम नांहि। सच्चो मार्ग बोलणां या लिखणां हे पार नां जाय। मोतियां हे रूप हे निरखणां हे, नां कि बोलणां हे।

इ म्हारे सूं केड़ो संबंधित है?

मैं हर रोज़ जगत में अपणां आप कॆ सिमटाई दै हॆ, क्यूंकि हम सोचै हॆ कि हर काईज़ नाम देवणां ज़रूरी हे। पर ई अध्याय हमां सिखावै हे कि गहराई रखणी हे, नां कि हर काईज़ पर नाम लगावणी हे। मैं सीखणां चाहै हॆ कि कब निचार ना राखी कॆ निरखणां।

आज म्हैं के करणो चाहीजे?

आज मैं कोई एक काम कॆ बिना नाम दिये करणां चाहै हॆ। जे मैं करणां हॆ, ओकरो नाम नां सोचणां।

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म्हारो विचार

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