अध्याय 24

पैरों के बल खड़ा होना

企者不立,跨者不行。自见者不明,自是者不彰,自伐者无功,自矜者不长。
其在道也,曰余食赘行。物或恶之,故有道者不处。
पैरों के बल खड़ा होने वाला स्थिर नहीं रहता। बड़े कदम उठाने वाला दूर नहीं जाता। जो खुद को दिखाता है, वह प्रकाशित नहीं होता। जो खुद को सही ठहराता है, वह प्रसिद्ध नहीं होता। जो खुद की प्रशंसा करता है, उसे यश नहीं मिलता। जो खुद का अभिमान करता है, वह दीर्घकाल तक नहीं रहता। मार्ग की दृष्टि में, ये सब अतिरिक्त भोजन और अनावश्यक क्रियाएँ हैं। सभी चीजें इनसे घृणा करती हैं, इसलिए मार्ग का अनुसरण करने वाला इनमें नहीं रहता।

गहन चिंतन

यह अध्याय किस बारे में है?

यह अध्याय अहंकार और दिखावे के दोषों को उजागर करता है। जो लोग खुद को बढ़ाने की कोशिश करते हैं, वे वास्तव में असफल होते हैं। संत सादगी और विनम्रता में रहता है, अनावश्यक क्रियाओं से बचता है।

इसका मुझसे क्या संबंध है?

मेरे जीवन में, मैं कभी-कभी अपनी उपलब्धियों या क्षमताओं को दिखाने की कोशिश करता हूँ। यह अध्याय मुझे सिखाता है कि यह केवल मुझे कमजोर करता है। जब मैं विनम्र और स्वाभाविक रहता हूँ, तो मैं अधिक स्थिर और सम्मानित होता हूँ।

आज मुझे क्या करना चाहिए?

आज, मैं किसी भी प्रशंसा या मान्यता की इच्छा को छोड़ दूँगा। अपने काम को बिना दिखावे के करूँगा और देखूँगा कि कैसे यह मुझे आंतरिक शांति देता है।

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मेरा चिंतन

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