अध्याय 17

शासन के चार पड़ाव

太上,下知有之;其次,亲而誉之;其次,畏之;其次,侮之。信不足焉,有不信焉。
悠兮其贵言。功成事遂,百姓皆谓我自然。
सबसे बड़हन नेता ओकरा बा जेकरा के लोग केवल अस्तित्व के पता बा; ओकरा से ना प्रेम बा, ना भय, ना काहू के इज्जत। ओकरा के बाद ओ नेता बा जेकरा के लोग चाहत बा आरू प्रशंसा करत बा। फेर ओ नेता बा जेकरा के लोग डरत बा। आरू सबसे नीचा ओ नेता बा जेकरा के लोग तिरस्कार करत बा। जब नेता के भरोसा कम हो जाला, त लोग अविश्वासी हो जात बा। बड़हन नेता खाली अपने काम में लीन रहत बा आरू कम बोलत बा। जब काम सफल हो जाला आरू सब सुखी हो जात बा, त लोग कहत बा कि ई तs अपने आप हो गइल।

गहरा चिंतन

यह अध्याय किस बारे में है?

ई अध्याय बतावेला कि शासन के चार स्तर बा। सबसे बढ़िया ओ शासन बा जहाँ लोग जानत नाहीं कि शासक बा; दूसरा जहाँ लोग ओकरा के चाहत बा; तीसरा जहाँ लोग डरात बा; आरू चउथा जहाँ लोग तिरस्कार करत बा। सच्चा बड़हन नेता खाली काम करत बा आरू लोग कहत बा कि ई सब अपने आप भइल।

यह मुझसे कैसे संबंधित है?

मेरा जीवन में भी ई बात लागू होत बा - मई जब कम दिखात बानी जा आरू खाली अपना काम में लगल रहत बानी जा, त परिवार आरू दोस्त मोती ज्यादा सम्मान देत बा। जब मई बहुत दिखावा करत बानी जा, त लोग दूरी रखत बा।

आज मुझे क्या करना चाहिए?

आज अपना किसी भी काम में कम दिखावा करबो। खाली मन के कहबो - मई खाली अपना कर्तव्य निभावत बानी जा, बाकी सब काहू के ले छोड़ देत बानी जा। बिना प्रशंसा के इंतजार के काम करबो।

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मेरा चिंतन

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